गोरखपुर, कोरोना वायरस के भय से सऊदी अरब सरकार ने उमरा करने पर रोक लगा दी है, इससे सैकड़ों जायरीन मायूस हैं। वहीं उनमें डर है कि कहीं उनका पैसा डूब न जाए। उमरा के लिए दो माह पहले ही लोगों ने ट्रैवल एजेंसी को पूरे पैसे का भुगतान कर दिया था। अनुमान के मुताबिक गोरखपुर के करीब 1050 लोगों का पैसा फंसा हुआ है। हालांकि सऊदी सरकार ने वीजा के मद में जमा की गई धनराशि तीन माह बाद लौटाने का आश्वासन दिया है।
हर साल 41 हजार जायरीन उमरा करने जाते हैं सऊदी
हर साल गोरखपुर जनपद से तकरीबन 11 हजार तथा गोरखपुर-बस्ती मंडल से 41 हजार जायरीन उमरा करने सऊदी अरब जाते हैं। सभी ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से बुकिंग कराते हैं। आम दिनों में प्रति व्यक्ति (15 दिनों के लिए) 60 से 70 हजार तो रमजान में 90 हजार से एक लाख रुपये खर्च होते हैं। इस राशि में आने-जाने का किराया, ट्रांसपोर्टेशन, होटल में ठहरना और खाना-पीना शामिल है। सबसे ज्यादा खर्च होटल और हवाई जहाज के किराये पर होता है। सऊदी अरब सरकार वीजे के मद में महज 80 रियाल (करीब 1500 रुपये) ही लेती है।
पैसा वापसी में एजेंसियों की आनाकानी
कई ट्रैवल एजेंसियां उमरे की यात्रा रद होने के बाद जायरीन को पैसा वापस करने में आनाकानी कर रही हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि एयरलाइंस कंपनियां पैसे वापस कर रही हैं, लेकिन मक्का व मदीना के होटल संचालक फिलहाल पैसे वापस करने को तैयार नहीं हैं। सऊदी सरकार ने वीजा तीन माह के लिए दिया है, ऐसे में वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद पूरे पैसे की वापसी हो पाएगी।
सब्र रखें जायरीन
30 वर्षों से ट्रैवल एजेंसी चला रहे सेराजुल हक का कहना है कि जिनकी यात्रा रद हुई है, वे सब्र रखें। उमरा के लिए वीजा तीन माह के लिए मिला है। इस दौरान अगर जायरीन किन्हीं कारणों से उमरा पर नहीं जा सके तो उनका पूरा पैसा वापस होगा।